जब ट्रेडिंग में लॉस हो जाए और मन न लगे

 # **जब ट्रेडिंग में लॉस हो जाए और मन न लगे** ट्रेडिंग में लॉस होना हर ट्रेडर की ज़िंदगी का हिस्सा है, फिर भी जब नुकसान होता है तो दिल और दिमाग दोनों पर गहरा असर पड़ता है। स्क्रीन पर लाल नंबर देखते ही मन भारी हो जाता है, भूख नहीं लगती, किसी से बात करने का मन नहीं करता और बार-बार वही सोच घूमती रहती है—“काश ये ट्रेड नहीं लिया होता।” यह एहसास बहुत आम है, और सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि आप अकेले नहीं हैं। लॉस सिर्फ पैसों का नहीं होता, वह आत्मविश्वास, उम्मीद और मेहनत पर भी चोट करता है। खासकर तब, जब आपने पूरे भरोसे और प्लानिंग के साथ ट्रेड लिया हो। ऐसे समय में खुद को कोसना आसान लगता है, लेकिन यही सबसे ज़्यादा नुकसान करने वाली आदत होती है। ट्रेडिंग एक प्रोबेबिलिटी गेम है—यहाँ सही निर्णय के बाद भी गलत रिज़ल्ट आ सकता है। जब लॉस हो जाए और मन न लगे, तो सबसे ज़रूरी कदम है **ट्रेडिंग से थोड़ा ब्रेक लेना**। उसी समय अगला ट्रेड लेकर लॉस रिकवर करने की कोशिश अक्सर और बड़ा नुकसान कर देती है। इसे ही “रिवेंज ट्रेडिंग” कहा जाता है, जो अकसर खाते को खाली करने की वजह बनती है। याद रखें, बाज़ार कहीं भागा नहीं जा रहा। खुद को शांत करने के लिए स्क्रीन से दूर जाएँ। थोड़ी देर टहलें, गहरी साँस लें, या कुछ ऐसा करें जो आपको ट्रेडिंग से अलग ले जाए। दिमाग को स्थिर किए बिना लिया गया कोई भी फैसला सही नहीं होता। भावनाएँ ठंडी होंगी, तभी सोच साफ़ होगी। इसके बाद अपने लॉस को **सीख** की तरह देखने की कोशिश करें। अपने ट्रेड को ईमानदारी से रिव्यू करें—क्या आपने अपने रूल्स फॉलो किए थे? क्या स्टॉप लॉस लगाया था? या भावनाओं में आकर ट्रेड लिया? अगर गलती हुई है, तो उसे स्वीकार करें; और अगर प्लान सही था, तो खुद को दोषी न मानें। सही प्रक्रिया के बाद गलत नतीजा आना भी इस गेम का हिस्सा है। मन न लगने की एक वजह यह भी होती है कि हम लॉस को अपनी काबिलियत से जोड़ लेते हैं। “मैं अच्छा ट्रेडर नहीं हूँ”—यह सोच बहुत नुकसानदेह है। एक या कुछ ट्रेड आपके पूरे करियर को परिभाषित नहीं करते। दुनिया के बड़े-बड़े ट्रेडर्स और निवेशकों ने भी भारी नुकसान झेले हैं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इस समय अपने **रिस्क मैनेजमेंट** पर ध्यान देना ज़रूरी है। ऐसा रिस्क लें कि लॉस होने पर आपकी ज़िंदगी और मानसिक शांति प्रभावित न हो। अगर एक ट्रेड का नुकसान आपको तोड़ देता है, तो समझिए रिस्क ज़्यादा था। छोटा रिस्क = शांत दिमाग। लॉस के बाद मन भारी हो, तो किसी भरोसेमंद इंसान से बात करें—जो ट्रेडिंग को समझता हो या कम से कम आपको जज न करे। दिल की बात कह देने से मन हल्का होता है। अगर बात करने का मन न हो, तो अपने जर्नल में सब लिख दें—क्या महसूस हो रहा है, क्या डर है, क्या सीख मिली। याद रखें, बाज़ार सिर्फ चार्ट नहीं है; यह आपकी मानसिकता की भी परीक्षा लेता है। जो ट्रेडर अपने इमोशन्स को संभालना सीख लेता है, वही लंबे समय तक टिक पाता है। जीत आपको खुश करती है, लेकिन लॉस आपको मजबूत बनाता है—अगर आप उससे सीखें। अगर लगातार लॉस हो रहा है और मन बिल्कुल टूट-सा गया है, तो कुछ समय के लिए लाइव ट्रेडिंग बंद करके **पेपर ट्रेडिंग** करें। इससे बिना पैसे के डर के आप अपनी रणनीति और आत्मविश्वास दोनों को सुधार सकते हैं। खुद को यह याद दिलाते रहें कि यह सिर्फ एक फेज़ है। हर ट्रेड एक नई शुरुआत है, लेकिन सिर्फ तब जब आप मानसिक रूप से तैयार हों। जल्दबाज़ी नहीं, मजबूरी में ट्रेडिंग नहीं। अंत में, खुद पर दया करें। आप सीख रहे हैं, बढ़ रहे हैं। एक दिन का लॉस आपकी पूरी मेहनत को बेकार नहीं बनाता। धैर्य, अनुशासन और सही सोच के साथ आप फिर से खड़े होंगे—और पहले से ज़्यादा समझदार बनकर।

ट्रेडिंग में लॉस होना आम बात है, लेकिन जब नुकसान दिल और दिमाग दोनों पर असर डालने लगे, तब असली चुनौती शुरू होती है। यह लेख उन ट्रेडर्स के लिए है जिनका लॉस के बाद मन नहीं लगता और जो फिर से खुद को संभालना चाहते हैं

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